About me

A mother, wife and civil servant, a conscientious citizen and patriot ----- my abiding love for books has made me try my hand at writing poetry, none of which is anything but the strictly spontaneous outpouring of a mind that prizes truth and harmony, above all else.

Monday, April 9, 2012

तुम

मेरी वफ़ा को मेरी कमज़ोरी समझते हो
ना समझ हो, ना काबिल ए वफ़ा तुम हो
सोचती हूँ कभी छोड़ दूं राह ए वफ़ा
बिखर जाओगे, खू ए शाहतिर तुम हो

Tuesday, March 6, 2012

एक अक्षयपात्र खोजा जाये
जहाँ दिखाई दे सड़क पर
बच्चा कोई भीख माँगता
वो पात्र उसे थमा दिया जाये
भर पेट खाए, पात्र लौटाए

लेकिन घर में बैठें होंगे
बूढ़े, लाचार दादी बाबा
भाई बहन जो अभी हैं छोटे
उनका पेट भरेगा कैसे

क्या हजारों लाखों अक्षयपात्र खोजें
या फिर सबको इतना सक्षम बनाएँ
अपना अक्षयपात्र वो स्वयं तराशें
अपने हाथों से
अपनी मेहनत से
अपने विवेक से

चलो, सबको शिक्षित बनाएँ
इश्क में डूबें या दरिया में
ज़िन्दगी हर हाल सुपुर्द ए खुदा है

ऐतबार -ए -खुदा

ग़म आते हैं , चले जाते हैं
रहता है तो बस ऐतबार -ए -खुदा
दिल शाद कभी , नाशाद कभी
नहीं बदलता तो बस ऐतबार -ए -खुदा

Monday, March 5, 2012

Day and Night


(1)
the stillness of dawn
petals dance upon the breeze
eloquent silence
(2)
feathery white clouds
playing tag languorously
a divine play field
(3)
dusk settles down softly
wings aflutter they return
as do souls one day
(4)
star studded darkness
descends swiftly, surely
healing weary souls
(5)
sliding into dreams
traversing strange new lands

seeking renewal 

Monday, February 27, 2012

Dirty socks

as I turned the socks inside out
to put them in the laundry
I had a moment of epiphany
Is this why He makes us undergo
all manners of misery ---
to get our souls squeaky clean?

Saturday, February 25, 2012

गीत

आज एक गीत था हवाओं में
चंचल, सुरीला, चुलबुला
कुछ तुम्हारी हँसी जैसा

गीत मैनें देर तक गुनगुनाया
लबों पर लिए मुस्कान
और दिल में वो तरंग
जो मचलती है जब
फज़ाएँ सुनाएं तुम्हारे
आने का पैगाम

फिर थम गयी हवा
गीत लबों से गिरा
टुकड़े टुकड़े हुआ

तुम नहीं आये